Birthday Special: कभी घिसी हुई चप्पल में कैलाश खेर छानते थे पूरी मुंबई, आज म्यूजिक इंडस्ट्री के हैं बादशाह

 


 अपनी सुरीली आवाज़ से सबके कान तर कर देने वाले कैलाश खेर आज अपना 48 बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। उन्होंने 'तेरी दीवानी' और 'सैंया' जैसे रूहानी गानों से यूथ के दिलों पर राज करते हैं। आज कैलाश खेर जिस मुकाम पर हैं वहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की है। आपको बता दें, छोटी सी उम्र में कैलाश खेर ने अपना घर छोड़ दिया था और उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 13 साल थी। देश के सबसे बड़े प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले कैलाश के मन ने बचपन से ही संगीत में बसा हुआ था।


छोटी उम्र में ही उन्होंने संगीत में महारथ हासिल कर ली थी। कैलाश ने बच्चों को भी म्यूजिक ट्यूशन देना शुरू किया। आपको बता दें, उनके पिता कश्मीरी पंडित थे और लोक गीतों में भी हमेशा से उनकी रूचि रही है। गौरतलब है कि कैलाश ने 4 साल की उम्र से गाना शुरु कर दिया था। उनका ये टैलेंट देख कर न ही सिर्फ उनके परिवार वाले बल्कि दोस्त-रिश्तेदार सभी उनके तारीफों के फूल बांधते थे। बचपन में अपनी आवाज से सबका मन मोह लेने वाले कैलाश के लिए मंज़िल तक पहुंचने की राह आसान नहीं थी।




14 साल की उम्र में छोड़ा अपना घर
जब उन्होंने सिंगिंग में अपना करियर बनाने का फैसला लिया तो उनके परिवार ने इसका विरोध किया। लेकिन कैलाश ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने महज़ 14 साल की उम्र में ही म्यूजिक के लिए अपना घर छोड़ दिया था। इस दौरान कैलाश काफी ठोकरें भी खाईं। कैलाश के लिए इतनी कम उम्र में इस रास्ते पर निकलना बिलकुल भी आसान नहीं था। ऐसे में रोजी-रोटी के लिए कैलाश बच्चों को म्यूजिक के ट्यूशन भी देने लगे थे। फीस के तौर पर हर बच्चे से वो 150 रुपये लिया करते थे। उन पैसों से कैलाश अपने खाने, पढ़ाई और संगीत का खर्चा निकालते थे। साल 1999 में कैलाश के लिए सबसे मुश्किल समय में से एक था।


अपनी पूरी पढ़ाई Delhi University करने के बाद कैलाश ने साल 2001 में मुंबई का रुख कर लिया। मुंबई की महंगाई और माहौल में गुजारा करने के लिए गायकी के जो भी ऑफर कैलाश को मिलते थे वो तुरंत अपना लेते थे। कैलाश के पास स्टूडियो जाने तक के पैसे नहीं होते थे। अपनी पुरानी और घिसी हुई चप्पलें पहने कर कैलाश मुंबई की गलियां छानते हुए घुमते थे। कैलाश के लिए मुंबई एक नया शहर जरूर था लेकिन म्यूजिक के जूनून ने उन्हें इस मुश्किल दौर में हिम्मत दी। इसके बाद कैलाश के मुश्किल दिनों में आराम तब आया जब वो म्यूजिक डायरेक्टर राम संपत से मिले। जिन्होंने कैलाश को एड में जिंगस्ल गाने का ख़ास मौका दिया।



ये हैं बेहतरीन गाने
इतने सालों की कड़ी मेहनत का फल कैलाश को 'अंदाज' फिल्म से मिला। इस फिल्म में कैलाश मे 'रब्बा इश्क न होवे' गाना गाया था। जो लोगो के दिल में घर कर गया था। इसके बाद 'वैसा भी होता है' पार्ट 2 में कैलाश ने गाना 'अल्लाह के बंदे' गाया काफी ज़्यादा लोकप्रियता हासिल की। इसके बाद कैलाश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बॉलीवुड में उन्होंने 'रब्बा', 'ओ सिकंदर' और 'चांद सिफारिश' जैसे कई बेहतरीन गाने गाए। इनमें से दो गानों के लिए कैलाश को फिल्मफेयर का बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर के अवॉर्ड से नवाज़ा भी गया है।




कैलाश के अब तक के सफर की बात करें तो उन्होंने हिंदी में 500 से भी ज्यादा गाने गाए हैं। इसके अलावा वो नेपाली, तमिल, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़, बंगाली, उड़िया और उर्दू भाषा में भी कई गाने गाए हैं। इतना ही नहीं कैलाश का 'कैलाशा' नाम से अपना खुद का एक बैंड भी है जो नेशनल और इंटरनेशनल शोज भी करता है।


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