मां का किरदार हर कोई नहीं निभा पाता। इस किरदार में इतनी मासूमियत जो होती है। हमारी इंडस्ट्री में ऐसी कई अदाकारा हैं। जो ज़्यादातर मां के किरदार निभाने के लिए जानी जाती हैं। 21 जून 1958 को जन्मीं रीमा लागू आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके निभाए हर एक किरदार आज भी हमारी यादों में जिंदा हैं। रीमा लागू ने अपने अभिनय का जादू बड़े पर्द के साथ साथ छोटे पर्दे पर भी खूब चलाया था। रीमा लागू ने अपने एक्टिंग से साबित किया था कि वो ख़ुशी और दुखी हर तरह के किरदार खुद को ढ़ाल सकती हैं।
मराठी सिनेमा से की थी शुरुआत
हालांकि, पर्दे पर उनका मां का स्वरूप सबसे ज्यादा पसंद किया गया था। वो अक्सर पर्दे पर मां के उस रूप में नजर आती थीं, जिसे देख कर किसी को भी अपनी मां याद आ जाए। एक सादगी, एक भोलापन और वही अपने बच्चों के लिए दुनिया समाज से लड़ जाने वाली अकड़। रीमा अपने हर किरदार में एक मां के गुण जिया करती थीं। आपको बता दें, रीमा लागू ने अपने करियर की शुरुआत मराठी सिनेमा से की थी।
कई सालों तक रीमा ने मराठी थिएटर में काम किया जिसके बाद उन्होंने बॉलीवुड और मराठी फिल्मों में एंट्री ली। लेकिन रीमा 59 साल की उम्र में 18 मई 2017 को हमेशा हमेशा के लिए इस दुनिया से अलविदा कह गईं। अपने फिल्मी करियर में रीमा ने पर्दे पर मां के कई रोल अदा किए हैं, तो चलए उनके जन्मदिन के ख़ास मौके पर उनके कुछ ख़ास किरदारों की बात करते हैं।
मैंने प्यार किया
साल 1989 में रिलीज़ हुई फिल्म 'मैंने प्यार किया' में रीमा ने सलमान की मां का किरदार निभाया था। उन्होंने फिल्म में एक ऐसे लड़के की मां का किरदार निभाया था जो उसके दिल का हाल बखूबी समझती हैं और जानती है कि उनका बेटा सही है। वो अपनी होने वाली बहू को बहू की तरह नहीं बल्कि बेटी की तरह मानती हैं। इस फिल्म में उनके प्यारे से किरदार को दर्शकों ने काफी ज़्यादा पसंद किया था। हम आपके हैं कौन
1994 में रिलीज हुई फिल्म 'हम आपके हैं कौन' में रीमा ने माधुरी दीक्षित की मां का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उनकी बड़ी बेटी का किरदार निभाने वाली रेणुका यानि पूजा की मौत हो जाती है। अब अपनी बेटी को खो चुकी एक मां किस दुख से गुज़र रही है उसका अंदाजा कोई भी नहीं लगा सकता है। वो अपने परिवार को बांध कर रखती हैं। फिल्म में उनकी जबरदस्त अदाकारी सबको पसंद आई थी।कुछ कुछ होता है
1998 में रिलीज़ हुई फिल्म 'कुछ कुछ होता है' में रीमा लागू ने काजोल की मां का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उन्होंने उस मां का किरदार निभाया था जो अपनी बेटी के पहले प्यार के ना मिल पाने के दर्द को बहुत अच्छी तरह से समझती हैं। वो अपनी बेटी से कहती हैं, 'जो घर प्यार नहीं बल्कि समझौते की नींव पर बना हो वो घर नहीं होता बेटी मकान होता है'। इसके साथ उन्होंने सीख दी की जीवन में प्यार का होना बेहद जरूरी है।
हम साथ साथ हैं
साल 1999 में रिलीज हुई फिल्म 'हम साथ साथ हैं' में रीमा लागू ने चार बच्चों की मां का किरदार निभाया था। इस फिल्म में भी वो सलमान की मां बनीं थीं। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसी मां का किरदार निभाया था जो अपने सौतेले बेटे विवेक से बहुत प्यार करती हैं, लेकिन समाज की बातों में आकर उसे उसके हक से अलग कर देती है। इसके बाद में जब उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है तो वो अपने बेटे-बहू और पोते को घर ले आती हैं। इस किरदार के जरिए रीमा ने बताया था कि मां अपने बच्चों से बहुत प्यार तो करती है। लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि कभी-कभी मां भी गलत हो।वास्तव
इसके अलावा संजय दत्त की सबसे दमदार परफॉरमेंस में से एक फिल्म 'वास्तव' में भी रीमा लागू ने बेहद ही शानदार किरदार निभाया था। फिल्म में दिखाया गया था कि अंत में रीमा अपने बेटे यानि संजय को गोली मार देती हैं। एक मां के लिए ऐसा कदम उठाना बिलकुल आसान नहीं होता है लेकिन इस किरदार से उन्होंने बताया था कि, एक मां किस तरह अपने सीने पर पत्थर रख कर अपने बेटे के डर को दूर करने के लिए उसे मुक्ति भी दे सकती है।आखरी वक़्त तक किया था काम
जब फिल्मो के ऑफर काम आने लगे तो रीमा लागू ने दोबारा टेलीविजन पर वापसी कर ली थी। उस समय एक्ट्रेस एक फेमस शो का हिस्सा थीं। 17 मई 2017 में शाम सात बजे तक जब शो की शूटिंग करके एक्ट्रेस घर लौंटी तो उन्होंने घरवालों से सीने में दर्द होने शिकायत की। इस दौरान दर्द बढ़ने पर एक्ट्रेस को मुंबई के कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी हॉस्पिटल में ले जाया गया, जहां उन्होंने कार्डियक अरेस्ट के चलते आधी रात 3 बजकर 15 मिनट पर दम तोड़ दिया और इस दुनिया को अलविदा कह दिया|
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